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Thursday, 28 October 2010

कलयुग का प्रभाव

संसार में अधिकांश लोग निज स्वार्थ की बात करते हैं। यह सब कलयुग का प्रभाव है। अपनी-अपनी बात कहना दूसरे की न सुनना एक सामान्य सी बात बनती जा रही है। अच्छे से अच्छा भी स्वार्थी हो गया है। दूजे के लिए कितने दुःख झेले हैं, यह लोग भूल जाते हैं। व्यक्ति पूर्णतः स्वार्थी हो गया है। जब व्यक्ति कोई सम्बन्ध बनाता है तो बड़ी-बड़ी बातें करता है। जब सम्बन्ध पक्का हो जाता है तो थोड़ा अन्तर आ जाता है। जब सम्बन्ध विवाह में परिवर्तित हो जाता है तो कुछ और बात होती है।
     एक लड़के का विवाह हुआ। उसके घर में तंगी थी। घर वाले बोले-÷तेरे ससुराल वाले अधिक धनी हैं, तू उनसे ले ले या पत्नी को कह दे।'
     लड़का बोला-'मैंने आपको विवाह के लिए नहीं कहा था। यदि कुछ लेना था तो विवाह से पूर्व ले लेते।'
लड़के के पिता बोले-÷हमको उन्होंने कहा था। जब भी धन की आवश्यकता होगी हम देंगे।'
    लड़का बोला-'आप स्वयं ही मांग लो, मैं नहीं मांगूंगा।'
    तंगी का समय था कुछ लिख-पढ़ी हुई मगर कुछ हुआ नहीं। अब उनकी लड़की का विवाह हो चुका था। विवाह से पूर्व उन्होंने कहा होगा, लोग कहते हैं पर करते नहीं क्योंकि उनकी कथनी और करनी में अन्तर जो होता है। कई लोग कहते हैं हमें कुछ नहीं चाहिए। बाद में वे भी चाहते हैं हमें सब कुछ मिले। आज अधिकांश लोगों में परस्पर दूरी बढ़ती जा रही है।
     यह कहना तो बहुत सरल है कि मार्ग सहज है मगर चलने के बाद पता लगता है कि उस (मार्ग) पर क्या-क्या कठिनाईयां आती हैं?
     व्यक्ति मिलने पर अच्छा लगता है। अच्छा लगने से क्या होता है, उससे व्यवहार रखो तो ज्ञात होता है कि यह तो खोखला है और किसी भी काम का नहीं है। अनेक लोग की तो यह प्रवृत्ति होती है कि गलत मार्ग दिखा देते हैं। अब आप कितने परेशान होंगे उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है। उनकी आदत तो  आपको गलत मार्ग दिखाने की थी। आजकल एक से अधिक व्यक्ति कहीं भी होते हैं तो उनमें परस्पर क्लेश होता ही है। इससे मुक्त तो व्यक्ति हो ही नहीं सकता है। यह तभी हो सकता है जब सम्बन्ध से पूर्व उसके साथ व्यवहार रखो। व्यवहार से ही अच्छे-बुरे या खरे-खोटे की पहचान होती है।
      यह सत्य है कलयुग चल रहा है। भागदौड़ से परिपूर्ण जीवन में सभी के पास समयाभाव है। वैसे भी शोपीस या दिखावे का जमाना है। सभी दोहरा व्यवहार रखते हैं। दिखाने के दांत कुछ और खाने के दांत कुछ होते हैं। संसार में विचरित व्यक्ति अन्दर से कुछ ओर और बाहर से कुछ और हैं। कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। कलयुगी संसार का विचित्र जीव व्यक्ति पहले प्यार करता है, सब्ज बाग दिखाता है और स्वार्थ सिद्ध हो जाने के बाद पहचानता भी नहीं है। पहले लोग चापलूसी करते हैं और जब कुछ बन जाते हैं तो फिर पहचानते ही नहीं हैं और भूले से यदि पहचान लिया तो अधिक भाव नहीं देते हैं जिससे आप स्वयं किनारा कर जाओ। शकुंतला की कथा सभी जानते हैं। उन्होंने शकुन्तला से विवाह कर लिया। जब राजा वापस महल में गए तो यह भूल गए की मेरा शकुन्तला से विवाह भी हुआ था।
     संसार के रंग निराले हैं यहां तो लोग पल-पल में रंग बदलते हैं। किसी ने किसी को कहा-'अरे! तेरे घर में आग लग गई है।' 
     यह सुनकर वह तुरन्त भागने लगता है। थोड़ा भागने पर कोई परिचित मिल जाता है और उसे पता चल जाता है कि आग उसके घर में नहीं उसके पिछले घर में लगी है। 
यह सुनकर वह दौड़ना भी बन्द कर देता है और फिर धीरे चलने लगता है। अब उसे कोई जल्दी नहीं है क्योंकि आग उसके नहीं किसी ओर के लगी है।
      संसार स्वार्थ का है, स्वार्थ हो तो गधे को भी बाप बना लेता है। जब स्वार्थ नहीं हो तो बाप को बाप और भाई को भाई भी नहीं कहेंगे। दूजों से अधिक सम्बन्ध नहीं रखना चाहिए। सम्बन्ध बनाना बहुत सरल होता है पर निभाना कठिन। सम्बन्ध बनाएं तो निभाएं वरना बनाएं ही नहीं।
      जीवन सरल ढंग से जीना चाहिए। बनावट से दूर भागना चाहिए। बनावट के कारण लोग कर्जदार बन जाते हैं क्योंकि बनावट को बनाए रखने के लिए आवश्यक धन का इन्तजाम कर्ज लेकर करते हैं। इसकी टोपी उसके सर और उसकी टोपी अगले के सर करके जीवन नहीं जिया जा सकता है। यह जान लें सरल और किफायती जीवन सुखाधार है। इच्छा बढ़ानी बहुत सरल हैं पर उनको पूरा करना अत्यन्त कठिन। इच्छाएं जितनी चाहे बढ़ा लो बढ़ जाएंगी पर उनकी पूर्ति करना सरल नहीं है। 
      जीवन स्तर उठा लेना अत्यन्त सरल है क्योंकि सभी बैंक ऋण उपलब्ध करा देते हैं और किस्त बांध देते हैं और जब किश्त चुका नहीं पाते हैं तो सभी कुछ उठाकर वे ले जाते हैं। तब अपमान का घूंट पीकर रहना पड़ता है। स्तर उठाकर उसे बनाए रखना अत्यन्त कठिन है। दिखावे में पड़कर लालसा के चक्कर में पांव उतने नहीं पसारने चाहिएं जो चादर से बाहर निकल जाएं। पावं बाहर निकल जाएं तो जग हंसाई होती है। बहुत लोग शर्म के कारण आत्महत्या करके मृत्यु को चुन लेते हैं और बहुत लोग जीवट वाले होते हैं जो स्थान बदलते रहते हैं और पुराने परिचितों से मिलते तक नहीं हैं।
      जीवन सरल और मोहहीन होकर जीएं। यह मान लें कि ना काहू से दोस्ती और न काहु से बैर। सम दृष्टि से अपनी चादर के अनुरूप सरल ढंग से जीवन जीने में ही भलाई है। सम्बन्ध बनाएं उतने जो निभाए जा सकें। मिठास के चक्कर में अधिक मीठा डालना अहितकर हो जाता है। स्तर उठाएं उतना जितनी हैसियत हो या आय हो। यह कदापि न करें कि आय कम है और व्यय अधिक कर लें। जो आवश्यक है उसे करें लेकिन उस स्तर तक करें जो आप सरलता से कर सकते हैं। अधिक करने के चक्कर में या दिखावे में यह मत भूल जाएं कि कहीं खुद ही शोपीस न बन जाएं और जग हंसाई हो।

Tuesday, 26 October 2010

माँ

ये रिस्तो की मंडी है , यहाँ भीड़ मत लगाईये , और आप भाई साहब , जरा लाइन में आईये ,
हा जी माँ आपको क्या चाहिए ?? बहु ?? मिल जाएगी , जीतनी कलूटी मिलेगी उतनी सस्ती आयेगी , क्योकि परिवार में कुलता भी वही कहलाएगी ,
सूट वाली सस्ती और साड़ी वाली महँगी आयेगी , क्योकि साड़ी में आग भी तो जल्दी लग जाएगी ,
इसके संग एक बोतल मिटटी का तेल और माचिस फ्री में मिल जाएगी .
हा जी भाई साहब आपको क्या चाहिए ?? बहन ?? मिल जाएगी , आपको राखी भी बांध जाएगी ,
जहा ब्याह दोगे वही बैठ जाएगी , और बाद में आपका नाम पता तक भूल जाएगी .
श्रीमान आपको क्या चाहिए ?? प्रेमिका ??प्रेमिका इस मार्केट में नहीं है ,
ये पल में दुसरे को चली जाती है इसलिए इस पार कोई गारंटी या वारंटी नहीं है ,
आपको क्या चाहिए ? बीवी ? ये सस्ती भी है , महँगी भी है , और एक्सचेंज ऑफर पर भी उपलब्ध है , ये आइटम रिस्की है , इसलिए टैक्स फ्री है ,
पति जैसी आइटम पर, बेलन फ्री है ,
...........................................................
आपको क्या चाहिए ???  "माँ"
जी "माँ' जैसी कोई छावं यहाँ नहीं है , इसलिए इसका कोई मोल भाव नहीं है ,
यदि आपके पास "माँ" नहीं है तो भगवन के पास जाईये , और दूसरा जनम ले के आईये ,
यदि आपकी किस्मत आप पर रहम खाएगी , तो अगले जन्म में आपको "माँ" जरुर मिल जाएगी ,
जरुर मिल जाएगी .

जीवन का रहस्य

एक मुर्ख ने दुसरे मुर्ख से कहा :-
अगर तुम यह बता दो की मेरी झोली  में  क्या है  ?
तो सारे अंडे (eggs) तुम्हारे.
और, अगर तुम यह बता दो की गिनती में कितने है ?
तो 8 के 8 अंडे (eggs) तुम्हारे.
और अगर तुमने यह भी बता दिया की किस जानवर के है ?
तो मुर्गी भी तुम्हारी....

दुसरे मुर्ख ने कहा :-
यार !
कुछ हेल्प करो,
बहुत ही जटिल  प्रशन  है.....

SO THE MORAL IS:-
हमारी जिन्दगी के हर सवाल के जवाब भी हमारी जिन्दगी में छिपे है, 
फिर  भी हम समझ नहीं पाते....

Family of क्रोध

क्रोध का अपना पूरा खानदान है ... क्रोध की एक लाडली बहन है -"जिद्द" वह हमेशा क्रोध के साथ साथ रहती है..क्रोध की पत्नी है "हिंसा" वह पीछे छिपी रहती है पर कभी कभी आवाज़ सुनकर बाहर आ जाती है...क्रोध के बड़े भाई का नाम है "अहंकार"..क्रोध का बाप भी है जिससे वह डरता है उसका नाम है "भय".... "निंदा" और "चुगली" क्रोध की बेटीयां है एक मुह के पास रहेगी और दूसरी कान के पास "बैर" बेटा है ...."इर्ष्या" इस खानदान की नकचढ़ी "बहु" है ...."घृणा" इस परिवारी की "पोती" है घृणा हमेशा नाक के पास रहती है ...नाक भौं सिकोड़ना इसका काम है और इसकी एक माँ है उसका नाम है "उपेक्षा"....

स्वर्ग मेरी मुट्ठी me ho iske liye हme क्या krna Hoga ?

MAI KAHTA HU:-
Kuchh mat kro...............bas itna kro..............
Dimaag ko "thandha" rakho.
Jeb ko "garam" rakho.
Aankho me "sharam" rakho.
Jubaan ko "naram" rakho. aur
Dil me "raham" rakho.

Agr tum aisa kr sako to phir tumhe kisi swarg tak jaane ki jarurat nahi hai. Swarg khud tumtak chalkr aayega.

vidambna yahi hai ki hm swarg to chahte hai, magar swargwaasi hona nahi chahte.


Friday, 22 October 2010

अथ श्री नेताय नमः

 ye kavita mere dwara nahi likhi gai hai..

मैं नेता हू
कभी हाथ में लालटेन लिए
कभी साईकिल की सवारी करते
तो कभी ......
कमल -फूल का झंडा
लहराते मैं मिल जाउगा ॥

नेता बनाने के लिए
कड़ी पढाई से गुजरना होता है ॥
अनिवार्य विषय है ...
" जनता के वोट कैसे बटोरे""मंत्री पद हथियाने के तौर -तरीके "
और
"विपक्छी पार्टी को पटकनी -कब और कैसे "
अतिरिक्त विषय है ....
गठबंधन - कब ,कैसे और क्यों

मैं नत मस्तक हू
आंबेडकर साहब का
एक तो कोई उम्र सीमा तय नहीं की
दूसरा अनिवार्य योग्यता तय नहीं की ॥

जैसे विद्यार्थियों के ग्रेड होते है ....
हम नेताओ के भी ग्रेड है
ए ग्रेड -दिल्ली तक पहुँच वाले
बी ग्रेड -राज्य की राजधानी में घुमने वाले
सी ग्रेड -जिला मुख्यालय में टहलनेवाले
डी ग्रेड -प्रखंड मुखाय्लय तक की हैसियत वाले ॥

प्रोमोशंन के चांस है
आपसी लेग पुलिंग के ज़रिये ॥

बॉलीवुड में देखिये
सभी स्टार के लड़के
हीरो में चल रहे है ॥

डोक्टर अपने लड़के को
डोक्टर बनाना चाहता है
इनजीनियर भी ऐसा ही चाहते है

मुझे तकलीफ होती है
मीडीयावाले वंशवाद का नारा देते है
जब अपने लड़के को टिकट देता हू

एक राज की बात बताता हू
अपने तक सीमित रखियेगा
मैं ५ साल में
उतना कमा लेना चाहता हू
जितना ६० साल में रिटायर होने तक
एक नौकरशाह कमा लेता है ॥

मैं तो एक मोहर हू
गलती हो जाए ...
सजा नहीं होती
नौकरशाहों के कंधे पर
बन्दुक रखकर निशाना साधता हू ॥
हमलोग चोर -चोर मौसेरे भाई है ॥

मेरा प्रिय काम
शिलान्यास करना
उद्घाटन करना ....
पुल का /रोड का /मकान का
और , अपने कोटे के पैसे का
बंदरबाट करना ॥

सभा -गोष्ठी में
ज्यादा शिरकत नहीं करता
फीता काटता हू
लौट जाता हू
पढ़े -लिखे लोग
मुझे घेरना चाहते है
प्रशन पूछकर...
उत्तर न आने पर
"नो कमेन्ट "...कह
मैं भी निकल जाता हू ॥

अपने सहयोगी की बातों
और एंटी पार्टी की हर बात में
मुझे राजनीती नज़र आती है ॥

आप कविता / कहानी /हास्य
कुछ भी लिखें ...
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
वैसे भी मैं ...
कुत्ते की पूंछ हू ॥ मैं नेता हू
कभी हाथ में लालटेन लिए
कभी साईकिल की सवारी करते
तो कभी ......
कमल -फूल का झंडा
लहराते मैं मिल जाउगा ॥

नेता बनाने के लिए
कड़ी पढाई से गुजरना होता है ॥
अनिवार्य विषय है ...
" जनता के वोट कैसे बटोरे""मंत्री पद हथियाने के तौर -तरीके "
और
"विपक्छी पार्टी को पटकनी -कब और कैसे "
अतिरिक्त विषय है ....
गठबंधन - कब ,कैसे और क्यों

मैं नत मस्तक हू
आंबेडकर साहब का
एक तो कोई उम्र सीमा तय नहीं की
दूसरा अनिवार्य योग्यता तय नहीं की ॥

जैसे विद्यार्थियों के ग्रेड होते है ....
हम नेताओ के भी ग्रेड है
ए ग्रेड -दिल्ली तक पहुँच वाले
बी ग्रेड -राज्य की राजधानी में घुमने वाले
सी ग्रेड -जिला मुख्यालय में टहलनेवाले
डी ग्रेड -प्रखंड मुखाय्लय तक की हैसियत वाले ॥

प्रोमोशंन के चांस है
आपसी लेग पुलिंग के ज़रिये ॥

बॉलीवुड में देखिये
सभी स्टार के लड़के
हीरो में चल रहे है ॥

डोक्टर अपने लड़के को
डोक्टर बनाना चाहता है
इनजीनियर भी ऐसा ही चाहते है

मुझे तकलीफ होती है
मीडीयावाले वंशवाद का नारा देते है
जब अपने लड़के को टिकट देता हू

एक राज की बात बताता हू
अपने तक सीमित रखियेगा
मैं ५ साल में
उतना कमा लेना चाहता हू
जितना ६० साल में रिटायर होने तक
एक नौकरशाह कमा लेता है ॥

मैं तो एक मोहर हू
गलती हो जाए ...
सजा नहीं होती
नौकरशाहों के कंधे पर
बन्दुक रखकर निशाना साधता हू ॥
हमलोग चोर -चोर मौसेरे भाई है ॥

मेरा प्रिय काम
शिलान्यास करना
उद्घाटन करना ....
पुल का /रोड का /मकान का
और , अपने कोटे के पैसे का
बंदरबाट करना ॥

सभा -गोष्ठी में
ज्यादा शिरकत नहीं करता
फीता काटता हू
लौट जाता हू
पढ़े -लिखे लोग
मुझे घेरना चाहते है
प्रशन पूछकर...
उत्तर न आने पर
"नो कमेन्ट "...कह
मैं भी निकल जाता हू ॥

अपने सहयोगी की बातों
और एंटी पार्टी की हर बात में
मुझे राजनीती नज़र आती है ॥

आप कविता / कहानी /हास्य
कुछ भी लिखें ...
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
वैसे भी मैं ...
कुत्ते की पूंछ हू ॥

Thursday, 21 October 2010

Kya Dialog Hai !

I was watching the AFI 100 best quotes in Hollywood and I realize that the Hindi film industry or Bollywood as everybody likes to call it also has some great quotes even though everyone might argue about the most repeated one.  Hindi Movies has many good dialogs. I tried to remember many of them and I am sure I have forgotten many. You may agree with the list. I have created a page for the dialogs. Please update the comments ob that page and I will keep on updating in the permanent page or mail me at ghostrav@gmail.com
Listing some of the greatest movie quotes from the Hindi Film Industry in no particular order.
Don ka intezar to baara mulko ki police kar rahi hai. Lekin Don ko pakadna muskhil he nahi, namumkin bhi hai
- Amitabh Bachchan, Don (1978)

Mujhe iske Jootho ka style pasand nahi aaya
- Amitabh Bachchan, Don (1978)

Chain quli ki main quli ki chain
- Amitabh Bachchan and others, Satte Pe Satta (1982)

Basanti, In kutto ke samne mat nachna
-Dharmendra, Sholay (1975)

Mogamo Khush hua
- Amrish Puri, Mr. India (1987)

Yeh haath Mujhe de de thakur
- Amjad Khan, Sholay (1975)

Jab tak bhetne ko na kaha jaye, khade raho! Yeh Police station hai Tumhare baap ka ghar nahi!
- Amitabh Bachchan, Zanjeer (1973)

Zindagi aur maut uparwale ke haath hai jahanpana, jise na aap badal sakte hai na mein. hum sab toh rangmanch ki katputlia hai, jiski door uparwale ke haath bandhi hai. Kan, Kaun, kaise uthega, yeh koi Nahi janta.
- Rajesh Khanna, Anand (1970)

Yeh bhi toh nahi keh sakta, ki meri umar tujhe lag jaye!
-Rajesh Khanna, Anand (1970)

Koi mar gaya kya?
Akshaye Khanna, Dil Chahta Hai (2001)

Kitne aadmi the?
- Amjad Khan, Sholay (1975)

Kaun Kambakht Bardasht karne ke liye peeta hai…
-Shahrukh Khan, Devdas (2002)

Kaun?
-Urmila Matondkar, Kaun? (1999)

Jab gaaon main bachchha rota hain,to uski maa kahti hai ki beta soja soja warna crime master gogo aa jayega..
Aamir Khan, Andaz Apna Apna (1994)

Itna sannata kyon hai bhai?
A K Hangal, Sholay (1975)

Jhakasssssss
- Anil Kapoor, Yudh (1985)

Mein to unko taab se janti hu jaab se Mein panch saal ki thi!!
-Sridevi, Lamhe (1991)

Rishtey main to hum tumharey baap lagtey hain, Naam hai Shenshah
Amitabh Bachchan, Shahenshah (1988)

Phata Poshter…. Nikla HERO!!!
- Naseerudin Shah, Hero Hiralal (1988)

Humaara naam Soorma Bhoopali aise nahin hai!!!
- Jagdeep, Sholay (1975)

Do rupaye main kya saara jungle kareedoge?
- Jagdeep, Sholay (1975)

Mumbai ka bhai kaun?
- Manoj Bajpai, Satya (1998)

Na koi maarta hai, na koi marta hai
- Manoj Bajpai, Aks (2001)

Main tumhe chand dikha raha hoo aur tum mere ungli ki galti nikal rahi ho
- Sanjay Dutt, Khoobsurat (1999)

Tumhara naam kya hai basanti?
- Amitabh Bachchan, Sholay (1975)

Mein chota sa, pyara sa, nanha sa, baccha hoon
- Shakti kapoor, Chaalbaaz (1989)

Police officer, you are a foolish officer
- Utpal Dutt, Golmaal (1979)

Bewkoof aur c**tiye mein dhage bhar ke pharak hota hega bhaiya dhaage kahenge bewkoof par honge chutoye. aur jo dhaaga hainch do, to kaun hai bewkoof, kaun chu**** , karod rupe ka prashan hai bhaiya….”
-Saif Ali Khan, Omkara (2006)

Sarat ghodo par lagate hai kathor, shero par nahi
- Ajay Devgan, Omkara (2006)

Yaadi yaadhi bailgaadi
-Saif Ali Khan, Omkara (2006)

Maamu let ja teri toh vaat lag gayi
Boman Irani, Munnabhai, M.B.B.S (2003)

Yeh bacchhon ke khelne ki cheez nahi, haath kat jaaye toh khoon nikal aata hai
- Raj Kumar, Waqt (1965)

Thakur to ggggiyo
- Ashok Sharaf, Karan Arjun (1995)

Maa main aa gaya
-Hrithik Roshan, Koi….Mil Gaya (2003)

Hawa tez hai Dinkar Rao.. Topi sambhalo, nahin to udd jayega
-Amitabh Bachchan, Agneepath (1990)

Naam:Vijay deenanath chauhan..Poora naam, baap ka naam:deena nath chauhan, maa ka naam, suhasini chauhan
- Amitabh Bachchan, Agneepath (1990)

daru pine se liwar kharab ho jaata hai..
- Amitabh Bachchan, Satte pe Satta (1982)

Duniya main do type ke kide hote hai..
- Amitabh Bachchan, Hum (1991)

Pyari nahi bahut sari baatein karti hai!!!!
- Amitabh Bachchan, Sholay (1975)

Yeh Ramgadh walen apni ladkiyon ko kaunse chakki ka aata khilate hai?
Amjad Khan, Sholay (1975)

Yeh dhai kilo ka haath jab kisi pe padta hai toh who uththa nahi uth jaata hai
- Sunny Deol, Damini

Tarikh Pe tarikh
- Sunny Deol, Damini (1993)

Agar koi mere ek gaal par thapad maare toh doosra gaal aage karne ke liye main Gandiji itna mahaan nahi hoo
- Nagarjun, Shiva (1989)

Chal Dhano! Aaj teri Basanti ki izzhat ka saawal hai
- Hema Malini, Sholay (1975)

Babumoshaiiiiii……
- Rajesh Khanna, Anand (1970)

Dikhaaee naheen deta? to kahaan rehta hai? ye aajkal apna malhotra bhi dikhaaee naheen deta.. kahaan rehta hai vo? dikhaaee de to mere paas bhejna..
Anu Kapoor, Mr. India (1987)

Mere paas maa hai
Shashi Kapoor, Deewar (1975)

Hum jahan par khade hote hai, Line wahan se suru hoti hai
- Amitabh Bachchan, Kaalia (1981)

Arre sir kya baat kar rahe hain aap? hamaara akhbaar to ek chhoti si family hai.. main kaise seema ko nikaal sakta hoon.. vo to bas jab isne kaha ki aap dikhaaee naheen dete to……… lekin ab jab maine aapko dekha.. mera matlab hai naheen dekha…. to… dekha na.. ki naheen dekh sakte….
- Anu Kapoor, Mr. India (1987)

Balmaaaa
Shakti Kapoor, Chalbaaz (1989)

Ki..ki…ki…Kiran
-Shahrukh Khan, Darr (1993)

Mooche ho to Nathulal jaise ho….warna na ho
- Amitabh Bachchan, Sharaabi (1984)

Dosti ki hai – nibhani toh padegi
- Salman Khan, Maine Pyar Kiya (1989)

Sara saher mujhe loin ke naam se jaanta hai
Ajit, Kalicharan (1976)

Aaisa he hoo main..
Ajay Devgan, Pyar toh Hona he tha (1998)

Thoda TV ko dekhne, Thoda Biwi ko dekhne ka
- Kunal Vijaykar, Ab Tak Chappan (2004)

Gaaaaaang!!
-Sanjeev Kumar, Angoor (1982)

Kaunsa labz?
Paresh rawal. Hera Pheri (2000)

Preetam aan milo
Sanjeev Kumar. Angoor (1982)

Bada footage kha rahee hai Bus
- Sanjeev Kumar, Angoor (1982)

Ek macchar aadmi ko hijda bana deti hai
- Nana Patekar, Yashwant (1997)

Main janta hoo aapko sahare ki jaroorat nahi, main toh sirf saath dene aaya hoo
- Priyanshu Chatterjee, Tum Bin (2001)

Jhooth nahi pasand mujhe. Kahan tha tumse
- Ajay Devgan, Hum Dil De Chuke Sanam (1999)

Aaj Khush toh bahut honge tum?
- Amitabh Bachchan, Deewar (1975)

Mere pitaji kehte the ki kurta toh sharir ke uprardh ki lajja nivaran ke liye hota hai
- Amol Palekar, Golmal (1979)

eeeeeeeeeeeeeeeeeeish!!!!
- Utpal Dutt, Golmal (1979)

Pyar karti hai mujhe?
- Abhay Deol, Ahista Ahista (2007)

Mujhe dosti karoge
- Dimple Kapadia, Bobby (1973)

Dibba!!!!
- Dimple Kapadia, Bobby (1973)

Aap ke paon dekhe, bahut haseen hai. Inhe zameen par mat utariyega  maile ho jayenge
–Raj Kumar,  Pakeezah (1972)

Pehle us aadmi ka sign leke aao jisne mere haath par yeh likh diya
- Amitabh Bachchan, Deewar (1973)

Mere paas maa hai!!!
- Shashi Kapoor, Deewar (1973)

Bade Bade desho main choti choti baatein hoti rehti hai
-Shahrukh Khan, Dilwale Dulhaniya Le jayenge (1995)

machli?? woh me kha gaya……mast tel me fry karke kha gaya…..cha mai la!!
- Paresh Rawal, Hera Pheri (2000)
Tumhare filmon mein bahut saare take hote hain, ek take nahin to doosra sahi, lekin zindagi ke is khel mein humein sirf ek take milta hai aur us take mein galti hui, to zindagi maut ke saamne ghutne tek deti hai!!
- Akhay Kumar, Main Khiladi Tu anari (1994)

Marathi manus Jaaga ho
-Paresh Rawal, Hera Pheri (2000)

Pyar sirf ek bar hota hai aur shaadhi bhi ekhi baar hota hai
-Shahrukh Khan, Kuch Kuch Hota Hai (1998)

Bol Diya?
- Arbaaz Khan, Pyar Kiya toh darna kya (1998)

yeah zulfe hai tumhari, ya hai resham ka jaal ….khushnasib hai wo ….khushnasib hai wo chuhe ..jinhone katre tumhare baal …..
- Laxmikant Berde, Maine Pyar Kiya (1989)

Aaj tak tum bolte aaye aur mein sunta aaya..aaaj…mein boloonga aur tum sunoge!
- Amitabh Bachchan, Anand (1971)

hai bhagwan…utta le re utta le…………….mereko nahi!! iin dono ko ..re baba!
-Paresh Rawal, Hera Pheri (2000)

Saab, aap bahut maara apun ko, par main jo ek maara, solid laga ki nahi!?
- Amitabh Bachchan, Amar Akbar Anthony (1977)

To tumhe kya lagta hai, mai is takiye pe roz baitha hoo
- Saif Ali Khan, Dil Chahta Hai (2001)

pushpa..yeh aansu poch dalo.. I hate tears
- Rajesh Khanna, Amar Prem (1971)

mere mann ko bhaya maine kutta kkat ke khaya
- Mukesh Tiwari, China Gate (1998)

babuji na kahan gao chodo, sab ne kaha ke paro ko chodo, paro ne kahan sharab chodo, ab tum kehe rahin ho ki is haweli ko chodo, hmm ek din ayega jab sub kahengi ki bus yeh duniya hi chodo.
- Shahrukh Khan, Devdas (2002)

Monday, 18 October 2010

क्या हम आधुनिकता के इस दौर में अपने रीती रिवाज को भूल गए है.....

क्यों आज हमारी युवा पीड़ी खोती जा रही है अपने नैतिक मूल्य? इस विषय पर अक्सर बहुत बार चर्चा सुनने को मिलती है, टी वी   न्यूज़ चैनल्स के माध्यम से और समाचार पत्रों के माध्यम से. अगर हम अपने परिवार को लेकर आगे बढें, अपने आस पड़ोस को लेकर आगे बढ़ें तो हम भी इस बात से जरूर इतेफाक रखेंगे कि आज की जो हमारी युवा पीड़ी है और जो युवा पीड़ी आ रही है, उसमे जरूर कही न कहीं नैतिक मूल्यों की कमी नजर आती है, जैसे नैतिक मूल्य हमारे पूर्वजों के थे, हमारे माता पिता के थे. ये जो आज की पीड़ी है जिसमे मैं भी आता हूँ जरूर कही न कही हम अपना नैतिक मूल्य खोते जा रहे है और ये दर नित प्रतिदिन बढती जा रही है. जो संस्कार हमारे पूर्वजों के थे वो संस्कार हम अपनी नई पीड़ी को देने में कामयाब नही हो पा रहे है और मेरी नजर में इसके दोषी भी हम ख़ुद है, हमारा परिवार है, हमारे माँ बाप है.

अगर मैं अपनी उम्र की युवा पीड़ी को उद्दहरण के तोर पर लेकर आगे बड़ों तो बचपन मैं दादा-दादियों द्वारा हमको अच्छी अच्छी कहानियाँ सुनने को मिलती थी. कहते है कि जब बच्चा छोटा होता है तो उस समय उसका मस्तिष्क बिल्कुल शून्य होता है, आप उसको जैसे संस्कार और शिक्षा देंगे वो उसी राह पर आगे बढता है. अगर बाल्यकाल में बच्चे को ये शिक्षा दी जाती है कि बेटा चोरी करना बुरा काम है तो वो चोरी करने से पहले सो बार सोचेगा, क्योंकि उसको शिक्षा मिली हुई है कि चोरी करना बुरी बात है. बाल्यकाल में बच्चे को संस्कारित करने में घर के बुजुर्गों का, माता पिता का बहुत बड़ा हाथ होता है. जैसे मैंने कहा कि जब छोटे थे और गाँव के बुजुर्ग दादा-दादियों की संगत में कुछ पल ब्यतीत करते थे, तो वो हमको बहुत कुछ अच्छी अच्छी कहानियाँ सुनाया करते थे जिसका कुछ न कुछ प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क पर पड़ता था, उनमे से कुछ कहानिया प्रेरणादायी होती थी, कुछ परोपकारी होती थी, कुछ जीवों पर दया करने वाली होती थी, कुछ देवी देवितोँ की होती थी और कुछ क्षेत्रीय कहानिया होती थी और सबका उद्देश्य हमारे अन्दर अच्छे संस्कारों को डालने का होता था और जो कि हमें संस्कारित बनाए रखने में आज भी बहुत मदद करते है. आज भी यदि हमारे कदम अपने पथ से विचलित होने का प्रयास करते है तो वो पुरानी कही हुई बातें याद आज जाती है और जो हमें फ़िर से सही पथ पर ले जाने का प्रयास करती है.

मैंने किसी प्रत्रिका मैं पढ़ा था कि किसी ५ साल के बच्चे से किसी सम्मानीय ब्यक्ति ने दुर्गा माँ की फोटो की ओर इशारा करते हुए पूछा बेटा ये कोन है तो बच्चे का जवाब था लोयन वाली औरत, जो इस लोयन के ऊपर बैठी है, किसी दूसरे सम्मानीय ब्यक्ति ने गणेश भगवान् के बारे में पूछा तो बच्चा गणेश जी को.Elephannt God.संबोधित करते हुए पाया गया. अब बताओ इसमे उस बच्चे का कसूर ही क्या है? जब कभी भी उस परिवार के सदस्य ने उसको ये बताने की कोशिश नही की कि बेटा ये दुर्गा माता है जिनका वहां शेर है या ये गणेश भगवान् जी है जिनका मुह हाथी की सूंड जैसा होता है तो उसको कैसे पता चलता?

जब हम छोटे थे तो हमारे पास एक नैतिक शिक्षा की किताब होती थी जिनमे कि बहुत अच्छी अच्छी कहानिया होती थी जिनको पड़कर बहुत आनंद आता था और एक बार मन में उन जैसा बनने की तीव्र इच्छा होती थी, लेकिन शायद आजकल उस नैतिक शिक्षा की किताब का अर्थ ही बदल गया है, उसका कोई महत्व ही नही रह गया है. मुझे तो लग रहा है कि शायद आज वो नैतिक शिक्षा की किताब स्कूलों से गायब भी हो चुकी होगी.

आज आपके घरों में दुनिया भर की कोमिक्स का ढेर मिल जाएगा, कंप्यूटर गेम्स की दुनिया भर की सी डी मिल जाएँगी, फिल्मी गानों की दुनिया भर की कैसेट आपके बच्चे के कमरे में मिल जायेगी लेकिन सरदार भगत सिंह, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद आदि मनीषियों की प्रेरणा श्रोत कहानियो की किताब आपके बच्चे के स्कूल बैग से नदारद मिलेगी और यहाँ तक कि आप भी ये कोशिश कभी नही करेंगे कि आप अपने बच्चे को ऐसी किताबें खरीद कर लायें. पहले यदि हमारे माँ बाप ऐसी किताबें नही भी खरीदा करते थे तो इसकी कमी हमारे दादा-दादी और बुजुर्ग पूरा कर देते थे, लेकिन आज हमारे बुरुगों की क्या स्तिथि है ये हम सब लोग जानते है. आज हर माँ बाप की ये कोशिश रहती है कि उनके बच्चे उनके दादा-दादी से दूर रहे, यदि कभी दादा दादी ने बच्चे को डांटने की हिमाकत भी कर ली तो उल्टा उनको उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है.

शायद ही अब किसी बच्चे को वो दादा दादी की कहानिया सुनने को मिलती होंगी, वो लोरी वो गीत सुनने को मिलते होंगे और शायद न ही कोई माँ बाप के पास इतना समय है कि वो अपने बच्चे को संस्कारित होने के संस्कार दे सकें. आज महात्मा गांधी, भगत सिंह, विवेकनन्द, लाल बहादुर शास्त्री  केवल या तो उनके जन्म दिवस के मोके पर ही याद किए जाते है या उनके निर्वाण दिवस पर, आज वो हमारे घरों से नदारद है, हमारे दादा-दादियों की कहानियो से नदारद है, हमारे माँ बाप की जुबान से  बहुत दूर है, हमारे आस से दूर है और हमारे पड़ोस से दूर है. तो कैसे हम ये आशा कर सकते है कि हमारे बच्चों से अच्छे संस्कार आयें? अच्छे संस्कार देने के लिए हमारे पास तो समय नही है, जो उनको अच्छे संस्कार दे सकते थे उनको तो उपेक्षित किया जाता है, जिन पुस्तकों को पढने से उनको संस्कारित किया जा सकता है उनका स्थान कोमिक्स, खिलोने और कोम्प्टर गेम्स ने ले लिया है, तो कैसे हम ये आश कर सकते है.

इसके बारे में हमको ख़ुद सोचना चाहिए क्योंकि कल हमें भी किसी का माँ / बाप और दादा/दादी  बनना है. हम ये निश्चय करते है कि हमारी संतान किस दिशा में जा रही है और हम उनको क्या संस्कार दे रहे है. इसका और कोई जिम्मेदार नही है, केवल हम ही है.

Saturday, 16 October 2010

Na Ye Chemistry Hoti , Na Mein Student Hota ............ .

Na Ye Chemistry Hoti , Na Mein Student Hota ............ .


Na Ye Lab. Hoti Na Ye Accident Hota


Abhi Practical Mein Aaye Nazar Ek Ladki


Sundar Thi Naak Uski Test Tube Jaisi


Baton Mein Uski Glucose Ki Mithas Thi


Sanson Mein Ester Ki Khushbu Bhi Sath Thi


Aankhon Se Jhalakta Tha Kuch Is Taranh Ka Pyaar


Bin Piye Hi Ho Jata Tha Alcohol Ka Khumar


Benzene Sa Hota Tha Uski Presence Ka Ehsas


Andhere Mein Hota Tha Radium Ka Abhas


Nazrein Mileen, Reaction Hua


Kuch Is Taranh Love Ka Production Hua


Lagne Lage Us Ke Ghar Ke Chakkar Aise


Nucleus Ke Charon Taraf Electron Hon Jaise


Us Din Hamare Test Ka Confirmation Hua


Jab Uske Daddy Se Hamara Introduction Hua


Sun Kar Hamari Baat Woh Aise Uchal Pade


Ignesium Tube Mein Jaise Sodium Bhadak Uthe


Woh Bole, Hosh Mein Aao, Pahchano Apni Auqat


Iron Mil Nahin Sakta Kabhi Gold Ke Sath


Ye Sum Kar Tuta Hamare Armanon Bhara Beaker


Aur Hum Chup Rahe Benzaldehyde Ka Kadwa Ghoont Pi Kar


Ab Us Ki Yaadon Ke Siwa Hamara Kam Chalta Na Tha


Aur Lab Mein Hamare Dil Ke Siva Kuch Aur Jalta Na Tha


Zindagi Ho Gayee Unsaturated Hydrocarbon Ki Taranh


Aur Hum Phirte Hain Awara Hydrogen Ki Tarah...

Thursday, 14 October 2010

poems....

फूल मुझे पसंद नहीं,
मै कांटो का दीवाना हू!
मै जलने वाली आग नहीं,
जल जाने वाला परवना हु!
ख्वाब मुझे पसंद नहीं,
मै हकीकत का आशियाना हु!
मै मीटने वाली हसरत नहीं,
जीने वाला अफसाना हु!
मै थमने वाला वक़्त नहीं,
न छु पाने वाला कीनारा हु!
मै रूकने वाली सांस नहीं,
सदा दील मे धडकने वाला सहारा हु!..
नीगाहे बचाकर जो चलते है हमसे ,
कभी उनको हमसे मोहोब्बत हुई थी
जो महबूब से अजनबी हो गए है
कभी उनको हमसे मोहोब्बत हुई थी.



एक आम आदमी की व्यथा
अजब महंगाई की गज़ब परेशानी
न दाना , न बिजली, न पानी
दैनिक वस्तुओं से दूर हुआ आम आदमी
वैट लगाएगा लोगों का वाट
पहले जैसी अब नहीं रहेगी ठाठ
टूट गई आम आदमी की कमर महंगाई से
नेताओ ने भी खड़े किये हाथ बड़ी रुसवाई से
क्योंकि
अब नेता भी कहने लगे हैं I am not astrologer
देख लो लोकतंत्र का कैसा हैं ये मंजर

Wednesday, 13 October 2010

जीवन का सत्य क्या हे

खुश रहने के आ़ठ तरीके 
1. जीवन तभी बदल जाता है जब आप बदलते हैं। न हो तो करके देखें। 
2. मन व मस्तिष्क सबसे बड़ी संपत्ति है, इसे मान लेंगे तो खुश रहेंगे आप। 
3. किसी की भी आत्मछवि जो उसने खुद बनाई होती है उसके खुश रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। अपनी छवि ऐसी बनाएं जो आपको हताश-निराश न करके खुशियां दे। 
4. सम्मान करना व क्षमा करना सीखें व खुश रहें।
5. जैसा सोचेंगे वैसे ही बनेंगे आप। अगर गरीबी के बारे में सोचेंगे तो गरीब रहेंगे और अमीरी के बारे में सोचेंगे तो अमीर रहेंगे। 
6. असफलता आती और जाती है यह सोचें और खुश रहने की कोशिश करें। 
7. जितने भी आशीर्वाद आपको मिले हैं आज तक, उनकी गिनती करें, उन्हें याद करके खुश रहें।
8. यदि आप पूरे जीवन की खुशी चाहते हैं चाहते हैं तो काम से प्यार करना सीखें।




                                                                                                      RAVI

जीवन का सत्य

दुःख आते हैं आने दो सुख जाते हैं जाने दो,
दुःख में दुखी होने नहीं मुश्किलों में देखो रोना नहीं,
जीवन की इस दरिया में नईया अपनी डुबोना नहीं।
सुख-दुःख जिसका नहीं भरोसा, आता सबके जीवन में
पंखुडियों का क्या है भरोसा चार दिनों का देंगीं साथ,
पर काँटों पर करो भरोसा जीवन भर जो रहेंगी साथ।
तुमको किनारा मिल जाएगा परम सहारा मिल जाएगा,
तुने किया जो इनपर भरोसा असंभव् भी संभव हो जाएगा।
सुखी लोग तो रह जाते हैं बिसर प्रभु के सुमिरन से,
दुःख एक ऐसा मार्ग है जिसपर चलकर ही सुख पाते हें
नयी-निराली बात नहीं यह, एक सच है बस जीवन का।
आज नहीं पहले ही सही एक दिल ने मेरे बात कही,
'मत करना भरोसा इस दुनिया पर जो देगी तेरा साथ नहीं
आत्मविश्वास तुम्हारा हो और धयान रहे बस मंजिल का।
अस्त होते सूरज से मैंने छोटा सा एक किया सवाल,
उगते हुए चाँद से फ़रमाया फ़िर दिल का हाल ,
मुझे क्यों भेजा इस दुनिया में जिसपर न कर सकूँ भरोसा ?
अब इतनी तुम मुझपर कृपा करना, जीवनकाल मेरा कम करना,
अगर मैं धोखा पा भी जाऊँ , गम न रहे कई बरसों का।

kuchh shayari ho jaye.....

“मोहब्बत हम क्या करें कोई इस काबिल मिलता नहीं,
कोई दिल से नहीं मिलता, किसी से दिल नहीं मिलता”


“तेरे प्यार की तमन्ना, गमें जिन्दगी के साये
बड़ी तेज़ आंधियां हैं , ये चिराग बुझ ना जाएँ …
कोई हल तू ही बता दे, इस दिल की कश-म -कश का
तुझे भूलना भी चाहा, तेरी याद भी सताए
तेरे प्यार की तमन्ना, गमें जिन्दगी के साये
बड़ी तेज़ आंधियां हैं , ये चिराग बुझ ना जाएँ”



पथ्थर में खुदा हो सकता है, मन्दिर मे नमजी जाये तो…,
सुन कर अजान आ सकते राम, मस्जिद मे दीप जलाये तो…।
ये सब ढाचे हैं, मकान हैं, इनमे उसका मुकाम नही…,
समझ- समझ ना समझ, समझ, ना समझ, समझ, ये बात समझ्…
दुनियां को बनाने वाले की फितरत का इतना रज़ समझ…॥



पथ्थर में खुदा हो सकता है, मन्दिर मे नमजी जाये तो…,
सुन कर अजान आ सकते राम, मस्जिद मे दीप जलाये तो…।
ये सब ढाचे हैं, मकान हैं, इनमे उसका मुकाम नही…,
समझ- समझ ना समझ, समझ, ना समझ, समझ, ये बात समझ्…
दुनियां को बनाने वाले की फितरत का इतना रज़ समझ…॥

kuchh shayari ho jaye.....

“उसने हमारे जख्मों का कुछ इस तरह किया इलाज,
मरहम भी लगया तो काटों की नोक से”


“तुम्हे गैरों से कब फुरसत, हम अपने गम से कब खाली,
चलो अब हो चुका मिलाना, ना तुम खाली ना हम खाली.”



राजनीति के साईड इफ़ेक्ट …… बहुत ही दर्दनाक होते है . सच में अगर दिल की सुनी जाये तो जीना मुश्किल हो जाये .
खैर राजनीति के तलपट को अगर आप टटोले तो रिश्तो के हुये नुकसान शायद ही कभी पूरे हो .

Tuesday, 12 October 2010

हिन्दू धर्म का इतिहास

हिन्दू धर्म का इतिहास अति प्राचीन है। इस धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता है, क्योंकि वैदिक काल और वेदों की रचना का काल अलग-अलग माना जाता है। यहां शताब्दियों से मौखिक परंपरा चलती रही, जिसके द्वारा इसका इतिहास व ग्रन्थ आगे बढ़ते रहे। उसके बाद इसे लिपिबद्ध करने का काल भी बहुत लंबा रहा है। हिन्दू धर्म के सर्वपूज्य ग्रन्थ हैं वेद। वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल का आरंभ ४५०० ई.पू. से माना है। यानि यह धीरे-धीरे रचे गए और अंतत: पहले वेद को तीन भागों में संकलित किया गया- ऋग्वेद, यजुर्वेदसामवेद जि‍से वेदत्रयी कहा जाता था। मान्यता अनुसार वेद का वि‍भाजन राम के जन्‍म के पूर्व पुरुरवा ऋषि के समय में हुआ था। बाद में अथर्ववेद का संकलन ऋषि‍ अथर्वा द्वारा कि‍या गया। वहीं एक अन्य मान्यता अनुसार कृष्ण के समय में वेद व्यास ने वेदों का विभाग कर उन्हें लिपिबद्ध किया था। इस मान से लिखित रूप में आज से ६५०८ वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। श्रीकृष्ण के आज से ५३०० वर्ष पूर्व होने के तथ्‍य ढूँढ लिए गए हैं।
हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व आर्यों की अवधारणा में है जो ४५०० ई.पू. मध्य एशिया से हिमालय
तक फैले थे। आर्यों की ही एक शाखा ने पारसी धर्म की स्थापना भी की। इसके बाद क्रमश: यहूदी धर्म दो हजार ई.पू., बौद्ध धर्म पाँच सौ ई.पू., ईसाई धर्म सिर्फ दो हजार वर्ष पूर्व, इस्लाम धर्म आज से १४०० वर्ष पूर्व हुआ।
धार्मिक साहित्य अनुसार हिंदू धर्म की कुछ और भी धारणाएँ हैं। मान्यता यह भी है कि ९० हजार वर्ष पूर्व इसका आरंभ हुआ था। रामायण, महाभारत और पुराणों में सूर्य और चंद्रवंशी राजाओं की वंश परम्परा का उल्लेख उपलब्ध है। इसके अलावा भी अनेक वंशों की उत्पति और परम्परा का वर्णन आता है। उक्त सभी को इतिहास सम्मत क्रमबद्ध लिखना बहुत ही कठिन कार्य है, क्योंकि पुराणों में उक्त इतिहास को अलग-अलग तरह से व्यक्त किया गया है जिसके कारण इसके सूत्रों में बिखराव और भ्रम निर्मित जान पड़ता है, फिर भी धर्म के ज्ञाताओं के लिए यह भ्रम नहीं है।
असल में हिंदुओं ने अपने इतिहास को गाकर, रटकर और सूत्रों के आधार पर मुखाग्र जिंदा बनाए रखा। यही कारण रहा कि वह इतिहास धीरे-धीरे काव्यमय और श्रृंगारिक होता गया जिसे आधुनिक लोग इतिहास मानने को तैयार नहीं हैं। वह समय ऐसा था जबकि कागज और कलम नहीं होते थे। इतिहास लिखा जाता था शिलाओं पर, पत्थरों पर और मन पर।
हिंदू धर्म के इतिहास ग्रंथ पढ़ें तो ऋषि-मुनियों की परम्परा के पूर्व मनुओं की परम्परा का उल्लेख मिलता है जिन्हें जैन धर्म में कुलकर कहा गया है। ऐसे क्रमश: १४ मनु माने गए हैं जिन्होंने समाज को सभ्य और तकनीकी सम्पन्न बनाने के लिए अथक प्रयास किए। धरती के प्रथम मानव का नाम स्वायंभव मनु था और प्रथम ‍स्त्री थी शतरूपा। महाभारत में आठ मनुओं का उल्लेख है। इस वक्त धरती पर आठवें मनु वैवस्वत की ही संतानें हैं। आठवें मनु वैवस्वत के काल में ही भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था।
पुराणों में हिंदू इतिहास का आरंभ सृष्टि उत्पत्ति से ही माना जाता है। ऐसा कहना कि यहाँ से शुरुआत हुई यह ‍शायद उचित न होगा फिर भी हिंदू इतिहास ग्रंथ महाभारत और पुराणों में मनु (प्रथम मानव) से भगवान कृष्ण की पीढ़ी तक का उल्लेख मिलता है।