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Thursday, 13 October, 2011

.....गजल सम्राट जगजीत जी की याद में .....

यूं न भुला पाएंगे




हमने अपने दर्द को
दूर किया जिनके सहारे
आज वह चले गए
हमसे ही दूर
अनंत की यात्रा पर
जाने वाले
हम तुम्हे यूं न भुला पाएंगे
जब-जब सुनेंगे आवाज तुम्हारी
तब-तब बहुत रूलाओगे
‘जग जीत’ छोड़ गए जग को
हर आँख नम है
हर दिल रो रहा
न जाने कहां तुम चले गए
वो कागज की कश्ती
वो बारिश का पानी
सब कुछ याद आ गया
महसूस किया हर दर्द आपने
क्या होता है प्यार
क्यों होता है बिछोह
सरहदें भी न रोक सकीं जिसको
आज वो परिंदे की मानिंद
चला गया दूर गगन में
न जाने कौन से देश
हम तुम्हे यूं न भुला पाएंगे
जब-जब सुनेंगे आवाज तुम्हारी
तब-तब बहुत रूलाओगे.

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