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Thursday, 22 September 2011

प्रेरणादायक कहानी : माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी

बहुत हो गया उल-फिजुल
आज मन कर रहा है
एक प्रेरणादायक कहानी दे
यह कहानी मुझे मेल से मिली थी.


एक बेकार आदमी ने ‘ऑफिस-बॉय’ की जोब के लिए माईक्रोसोफ्ट में अर्जी दी. वहां की एचआर मैनेजर ने उसे देखा और उस बंदे को इंटरव्यु के लिए बुलाया.




” अच्छा, तो तुम माईक्रोसोफ्ट में काम करना चाहते हो. तुम्हारा ई-मेल एड्रेस दो. ताकि मैं तुम्हें जवाब भेज सकुं कि कब से तुम्हें काम शुरू करना है.”


आदमी बोला: ” सर मेरा कोई ई-मेल आईडी नहीं है क्योंकि मेरे पास कम्प्युटर ही नही है.”
एचआर मैनेजर: ”तो फिर मुझे माफ करना. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर सकती. अगर तुम्हारे पास ई-मेल पता ही नहीं है तो तुम इस नोकरी के लायक नहीं.”


वह लड़का  बिना कुछ बोले उस ऑफिस से बहार निकल गया.  उसकी जेब में सिर्फ 10 रुपए थे.वह बेकार था और काम करके कुछ कमाना चाहता था. अचानक उसके मन में एक विचार आया. वह सीधा सब्जी मार्केट गया और वहां से उसने 10 रुपए के टमाटर खरीद लिए.


टमाटर खरीदकर वह उसी मंडी में बैठ गया. दो घंटे में उसके सारे टमाटर बिक गए. अब उसके पास 20 रूपए हो गए थे.


इस व्यापार में उसको बहुत मजा आया. फिर तो उसने 20 के टमाटर खरीदे और घर घर जाकर उसको बेचने लगा. धीरे-धीरे उसका व्यापार बढ़ने लगा. उसने एक दुकान खरीद ली. फिर उसने ट्रक खरीद लिया और वह उस मंडी का सबसे बड़ा व्यापारी बन गया.





पांच साल में तो वह शहर के सबसे धनी व्यक्तिओ की सूचि में सामिल हो गया. उसने अपने परिवार के भविष्य के लिए कुछ योजना बनाई और उसके चलते उसने अपना बीमा कराने का सोचा.




उसने एक बीमा एजेंट को बुलाया. बात बात में ऐजन्ट ने उससे उसका ई-मेल पता पुछ डाला. व्यापारी ने हसकर कहां. न तो मेरा कोई ई-मेल पता है और ना ही मेरे पास कोई कम्प्युटर है.
एजेंट सकते में पड़ गया: ” क्यां आपके पास ई-मेल पत्ता नही है ? शायद आप मजाक कर रहे हो…आप शहर के सबसे बड़े आदमी है… कभी आपने सोचा है कि अगर आप के पास ई-मेल पता होता तो आज आप क्या होते ?

हां…. तो शायद माईक्रोसोफ्ट कंपनी का ऑफिस-बॉय होता” 

व्यापारी हसंते हुए बोला.


Tuesday, 20 September 2011

हर एक बॉयफ्रेंड जरूरी होता है


ब्रेड के लिए जैसे सॉस होता है, वैसे हर एक बॉयफ्रेंड जरूरी होता है…
कोई फोन में हमारे बैलेंस डलवाए, कोई नया नया फोन दिलाए…
एक तुझे ब्रांडेड कपड़े दिलाए और एक तुझे डोमिनॉज में पिज्जा खिलाए..
कोई लुक में हीरो कोई जीरो होता है.. पर हर एक बॉयफ्रेंड जरूरी होता है…
कोई डार्लिंग कोई स्वीट हर्ट कोई जानू कोई बकरा होता है…
पर हर एक बॉयफ्रेंड जरूरी होता है.

जागो ग्राहक जागो


ट्यूशन शिक्षक: अबे गधे, होम वर्क क्यूं नहीं करता है तू ?

स्टूडेंट: तमीज से बात कर, साले कस्टमर से ऐसे बात करते हैं क्या? (जागो ग्राहक जागो)

पोस्टमैन आया


पोस्टमैन आया. 
एक छोटा लड़का मुंह में सिगरेट और हाथ में बीयर ले बाहर आया.
पोस्टमैन : पापा हैं.. ?
लड़का: मुझे देखकर लगता है मेरा बाप घर में होगा.


रिलायंस का नया प्रॉडक्ट


अगर रिलायंस वाले बच्चों का डायपर बनाएंगे तो उनका स्लोगन क्या होगा?





सिपंल “अब करलो सूसू चड्डी में”
धीरुभाई का सपना, 
हर लंगोटी में डायपर अपना.

Monday, 19 September 2011

सबसे बड़ी टेंशन


एक सुंदर लड़की ने आपसे लिफ्ट मांगी और रास्ते में उसकी तबीयत खराब हो गई. आप उसे हॉस्पिटल लेकर गए वहां डॉक्टर बोला आप बाप बनने वाले हैं. लो हो गई टेंशन…
आप बोले मैं इसका बाप नहीं हूं. फिर लड़की बोली यही इसका बाप है. और टेंशन…
पुलिस आई आपका मेडिकल चेक-अप हुआ. रिपोर्ट आई कि आप तो कभी बाप बन ही नहीं सकते. आपको और टेंशन..
खैर आपने भगवान को धन्यवाद दिया और निकल लिए. फिर रास्ते में ख्याल आया कि जो दो बेटे आपके घर पर हैं वह किसके हैं.. 
सबसे बड़ी टेंशन 

Friday, 16 September 2011

शब्द संभाले बोलिए

शब्द संभाले बोलिए ......

शब्द के हाथ न पाव रे ........

१। एक शब्द औषध करे..., एक शब्द करे घाव रे ......

२। मुख से निकला शब्द तो, वापिस फिर न आएगा .....

३। दिल किसी का तोरकर तू भी चेन न पायेगा .....

४। इसलिए कहते गुरूजी ,शब्द पे रखना ध्यान रे...

५। सच करवा भाता न किसीको ,...सच मीठा कर बोलिए...

६। गुरु की अमृत वाणी सुनकर, मुख से अमृत घोलिये...

७। इसलिए कहते गुरूजी, मीठा शब्द महान रे......

८। मुख की मौन देवता बनाती, मन की मौन भगवान रे.......

९। मौन से ही तुम अपने , शब्दों मैं भर लो जान रे ....

१०। इसलिए कहते गुरूजी,मौन ही भगवान रे...

११। ज्ञानी तो हर वक्त ही, मौन मैं ही है रहता ....

१२। मुख से कुछ न कहते हुए भी, सब कुछ ही है वो कहता ....

१३। इसलिए कहते गुरूजी, मौन ही वरदान रे.......

१४। एक शब्द औषध करे, एक शब्द करे घाव रे.....

तेरी रज़ा क्या है

जहाजों से जो टकराये, उसे तूफान कहते हैं।

तूफानों से जो टकराये, उसे इन्सान कहते हैं।।1।।

हमें रोक सके, ये ज़माने में दम नहीं।

हमसे है ज़माना, ज़माने से हम नहीं।।2।।

जिन्दगी के बोझ को, हँसकर उठाना चाहिए।

राह की दुश्वारियों पे, मुस्कुराना चाहिए।।3।।

बाधाएँ कब रोक सकी हैं, आगे बढ़ने वालों को।

विपदाएँ कब रोक सकी हैं, पथ पे बढ़ने वालों को।।4।।

मैं छुई मुई का पौधा नहीं, जो छूने से मुरझा जाऊँ।

मैं वो माई का लाल नहीं, जो हौवा से डर जाऊँ।।5।।

जो बीत गयी सो बीत गयी, तकदीर का शिकवा कौन करे।

जो तीर कमान से निकल गयी, उस तीर का पीछा कौन करे।।6।।

अपने दुःख में रोने वाले, मुस्कुराना सीख ले।

दूसरों के दुःख दर्द में आँसू बहाना सीख ले।।7।।

जो खिलाने में मज़ा, वो आप खाने में नहीं।

जिन्दगी में तू किसी के, काम आना सीख ले।।8।।

खून पसीना बहाता जा, तान के चादर सोता जा।

यह नाव तो हिलती जाएगी, तू हँसता जा या रोता जा।।9।।

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले।

खुदा बन्दे से यह पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।।10।

ज्ञान

कई रात्रियाँ तुमने सो-सोकर गुजार दीं और दिन में स्वाद ले लेकर तुम समाप्त होने को जा रहे हो। शरीर को स्वाद दिलाते-दिलाते तुम्हारी यह उम्र, यह शरीर बुढ़ापे की खाई में गिरने को जा रहा है। शरीर को सुलाते-सुलाते तुम्हारी वृद्धावस्था आ रही है। अंत में तो.... तुम लम्बे पैर करके सो जाओगे। जगाने वाले चिल्लायेंगे फिर भी तुम नहीं सुन पाओगे। डॉक्टर और हकीम तुम्हें छुड़ाना चाहेंगे रोग और मौत से, लेकिन नहीं छुड़ा पायेंगे। ऐसा दिन न चाहने पर भी आयेगा। जब तुम्हें स्मशान में लकड़ियों पर सोना पड़ेगा और अग्नि शरीर को स्वाहा कर देगी। एक दिन तो कब्र में सड़ने गलने को यह शरीर गाड़ना ही है। शरीर कब्र में जाए उसके पहले ही इसके अहंकार को कब्र में भेज दो..... शरीर चिता में जल जाये इसके पहले ही इसे ज्ञान की अग्नि में पकने दो।

धर्म

हम जो सत्कार्य करते हैं उससे हमें कुछ मिले – यह जरूरी नहीं है। किसी भी सत्कार्य का उद्देश्य हमारी आदतों को अच्छी बनाना है। हमारी आदते अच्छी बनें, स्वभाव शुद्ध, मधुर हो और उद्देश्य शुद्ध आत्मसुख पाने का हो। जीवन निर्मल बने इस उद्देश्य से ही सत्कार्य करने चाहिए।

किसी को पानी पिलायें, भोजन करायें एवं बदले में पच्चीस-पचास रूपये मिल जायें – यह अच्छे कार्य करने का फल नहीं है। अच्छे कार्य करने का फल यह है कि हमारी आदतें अच्छी बनें। कोई ईनाम मिले तभी सुखी होंगे क्या ? प्यासे को पानी एवं भूखे को भोजन देना यह कार्य क्या स्वयं ही इतना अच्छा नहीं है कि उस कार्य को करने मात्र से हमें सुख मिले ? है ही। उत्तम कार्य को करने के फलस्वरूप चित्त में जो प्रसन्नता होती है, निर्मलता का अनुभव होता है उससे उत्तम फल अन्य कोई नहीं है। यही चित्त का प्रसाद है, मन की निर्मलता है, अंतःकरण की शुद्धि है कि कार्य करने मात्र से प्रसन्न हो जायें। अतः जिस कार्य को करने से हमारा चित्त प्रसन्न हो, जो कार्य शास्त्रसम्मत हो, महापुरुषों द्वारा अनुमोदित हो वही कार्य धर्म कहलाता है।

मरने से डरना क्यों

जब मरना इतना अवश्यं भावि है तो मरने से डरना क्यों ? डरने से मौत नहीं मिटती। दूसरी बार मौत न हो इसका यत्न करना चाहिए।



अनेक बार मौत क्यों होती है ? वासना से मौत होती है। वासना क्यों होती है ? वासना सुख के लिए होती है। अगर आत्मा-परमात्मा का सुख मिल गया तो वासना आत्मा-परमात्मा में लीन हो जायेगी। परमात्मा अमर है। वासना अगर परमात्म-सुख से तृप्त नहीं हुई तो देखने की वासना खाने की वासना, सूँघने की वासना, सुनने की वासना और स्पर्श की वासना बनी रहेगी। पाँच ही तो विषय हैं और जिनको पाँच विषय का सुख दिलाते हो उनको तो जला देना है।


योगी इस बात को जानते हैं इसलिए वे अंतर आराम, अंतर सुख, अंतर ज्योत की ओर जाते हैं। भोगी इस बात को नहीं जानता, नहीं मानता इसलिए बाहर भटकता है। 

 भगवान कहते हैं-

 संतुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढ़निश्चयः।


मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद् भक्तः स मे प्रियः।।

'जो योगी निरंतर संतुष्ट हैं, मन-इन्द्रियों सहित शरीर को वश में किये हुए हैं और मुझ में दृढ़ निश्चयवाला है, वह मुझमें दृढ़ निश्चय वाला है, वह मुझमें अर्पण किये हुए मन-बुद्धिवाला मेरा भक्त मुझको प्रिय है।'

मैं कौन हूँ

मैं हूँ' यह तो सबका अनुभव है लेकिन 'मैं कौन हूँ' यह ठीक से पता नहीं है। संसार में प्रायः सभी लोग अपने को शरीर व उसके नाम को लेकर मानते हैं कि 'मैं अमुक हूँ... ।' नहीं.... यह हमारी वास्तविक पहचान नहीं है। अब हम इस साधना के जरिये हम वास्तव में कौन हैं.... हमारा असली स्वरूप क्या है.... इसकी खोज करेंगे। अनन्त की यह खोज आनन्दमय यात्रा बन जायेगी।

 सुख और दुःख हमारे जीवन के विकास के लिए नितान्त आवश्यक है। चलने के लिए दायाँ और बायाँ पैर जरूरी है, काम करने के लिए दायाँ और बायाँ हाथ जरूरी है, चबाने के लिए ऊपर का और नीचे का जबड़ा जरूरी है वैसे ही जीवन की उड़ान के लिए सुख व दुःख bरूपी दो पंख जरूरी हैं। सुख-दुःख का उपयोग हम नहीं कर पाते, सुख-दुःख से प्रभावित हो जाते हैं तो जीवन पर आत्मविमुख होकर स्थूल-सूक्ष्म-कारण शरीर से बँधे ही रह जाते हैं। अपने मुक्त स्वभाव का पता नहीं चलता।

इन्टरनेट अडिक्ट क्लिनिक

इस कविता की पंक्तियां
हास्य कविता जैसी लगेगी
मगर यह आपकी भूल होगी॥

"सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है "
"एड्स से बचिए "
"कोलेस्ट्रोल --हार्ट -आटैक का कारण"
की तरह .....
एक जुमला एक -दो साल बाद सुर्खियों में होगा ।
"इन्टरनेट से दूर भागने का शर्तिया इलाज "
चौक गए न आप
"इन्टरनेट अडिक्ट क्लिनिक " खुल चूका है ॥
इस बीमारी के लक्षण ---
बच्चो का दादा -दादी के गोद में
जाने से इंकार करना ॥
माँ -पिता की बातो को अनसुनी बनाना
खेल - कूद न करना
स्कूली बच्चो के बीच न जाना
इन्टरनेट के काल्पनिक दोस्तों से चत्तिंग करना
एक काल्पनिक दुनिया में खो जाना

अगर आपके बच्चे में
ये लक्षण दिखाए दे ....
इन्टरनेट अडिक्ट क्लिनिक में सम्पर्क करे

किस बच्चे पर बीमारी ज्यादा अत्टैक करेगी
वे बच्चे ...
जिनका जन्म दो - तीन कमरे के फ्लैट में हुआ है
जिन्होंने नहीं देखा
समाज क्या होता है
मैं बात कर रहा हु
वैसे बच्चो की
जिन्होंने कभी नहीं खाई
अंकुरे चने और गुड
जो हमेशा डायनिंग टेबल पर ही खाते है
जिनके लिए......
पालथी मारना
एक योग करने जैसा है
जो हमेशा शौपिंग के लिए माल गए
जिनके लिए गाँव जाना ....
एक साहसिक घटना से कम नहीं ।

क्या आप ऐसे जुमले
देखने की चाहत रखते है ??/

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है,

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है,
ना मा, बाप, बहन, ना यहा कोई भाई है.
हर लडकी का है Boy Friend, हर लडके ने Girl Friend पायी है,
चंद दिनो के है ये रिश्ते, फिर वही रुसवायी है.

घर जाना Home Sickness कहलाता है,
पर Girl Friend से मिलने को टाईम रोज मिल जाता है.
दो दिन से नही पुछा मां की तबीयत का हाल,
Girl Friend से पल-पल की खबर पायी है,
जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है…..

कभी खुली हवा मे घुमते थे,
अब AC की आदत लगायी है.
धुप हमसे सहन नही होती,
हर कोई देता यही दुहाई है.

मेहनत के काम हम करते नही,
इसीलिये Gym जाने की नौबत आयी है.
McDonalds, PizaaHut जाने लगे,
दाल-रोटी तो मुश्कील से खायी है.
जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है…..

Work Relation हमने बडाये,
पर दोस्तो की संख्या घटायी है.
Professional ने की है तरक्की,
Social ने मुंह की खायी है.
जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है

भाभी चाहिए.


लड़की: मुझे क्यूं देख रहे हो? तुम्हारी कोई बहन नहीं है क्या?
लड़का: है इसीलिए तो देख रहा हूं?
लड़की: क्यूं?
लड़का: मेरी बहन को भाभी चाहिए.